Top 35 Life Changing Brahmacharya Quotes in Hindi, ब्रह्मचर्य पर महापुरुषों के विचार
नमस्कार मेरे प्यारे भाईयो और बहनों आप सभी का Shridaskmotivation.com पर स्वागत है। दोस्तो आज की ये पोस्ट आप सभी के लिए बहुत ही स्पेशल और प्रेरणादायक साबित होने होने वाली है। क्योंकि इस पोस्ट के माध्यम से में आपके साथ Top 35 Life Changing Brahmacharya Quotes in Hindi में शेयर करने वाला हू।
Top 35 Life Changing Brahmacharya Quotes in Hindi | ब्रह्मचर्य कोट्स इन हिंदी
दोस्तो आर्टिकल को शुरू करने से पहले में आप सभी से कहना चाहूंगा कि में आप सभी के लिए हमारे इस Shridaskmotivation.com ब्लॉग पर प्रेरणादायक लोगो की सच्ची कहानियां और उनके द्वारा लिखी हुई किताबो की समरी और उसके साथ ही प्रेरक अनमोल विचार हिंदी में शेयर करता रहता हूं।
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Note: दोस्तों इस पोस्ट में ऐसे बहुत से ऐसे शब्द है, जिनको डायरेक्टली लिखना Google की Policy के खिलाप है, इसलिए हमने उन शब्दों के बिच में (_, . , *) ऐसे Symbols ऐड किये हुए है। इसलिए पढ़ते वक्त आप उसे समझ लीजियेगा।
ब्रह्मचर्य पर महापुरुषों के विचार – Brahmachari Quotes in Hindi
1. रोगी वो होता है जो भोगी होता है, जैसे जैसे वी*र्य शक्ति क्षीण होती हैं, वैसे ही मनुष्य दुर्बल और रोगी होता चला जाता है। ब्रम्हचारी पुरुष ही आरोग्यवान हो सकता क्यूंकि,
वेदों का कहना है की अगर कोई व्यक्ति एक साल तक अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करे, तो उसके बड़े से बड़े और भयंकर रोग भी जड़मूल से नष्ट हो जाते हैं।
2. जिस प्रकार एक राजा राज कोश, प्रजा और सेना के बिना राजा नही कहलाता और जैसे सुगंध के बिना फूल, फूल नही है और एक नदी, नदी के बिना नदी नही रहती है, ठीक उसी प्रकार एक आदमी ब्रह्मचर्य के बिना आदमी नही रह जाता है।
3. स्त्री से युद्ध और ज्ञान (नॉलेज) में जितना बहुत आसान है, लेकिन स्त्री के श्रृंगार से तुम ध्वस्त यानी की पराजित हो सकते हो।
4. किसी के प्यार के भावनाओ में न बहे, क्योंकि ये सिर्फ एक आकर्षण मात्र है, ब्रह्मचर्य का पालन करें।
5. अत्यधिक वी*र्यनाश के कारण चेहरा और शरीर पूरी तरह से खोखला हो जाता है और इसके कारण जवानी में ही बुढ़ापे वाली लक्षने दिखनी लग जाती है।
6. जैसे हर कुत्ता हड्डी को चबाता है, तो उसकी रगड़ से उसके खुद के मसूड़े में से खून निकलने लगता है, वह उसको चाटकर प्रसन्न होता है। और इतराता है की मुझे हड्डी में से खून पीने को मिल रहा है।
ठीक उसी प्रकार भोगी पुरुष और स्त्रियां कामवा*सना और बोघ में सुख भोगते हुए अपनी जीवनी शक्ति का नाश करते रहते है। और पुरूष सोचता हैं की स्त्री शरीर में सुख है और स्त्रियां सोचती है की पुरुष शरीर में सुख है।
7. जो आदमी दृष्ट संगती का त्याग करके व्यभिचार से दूर रहते हुए, सिर्फ संतान प्राप्ति के लिए ही अपनी पत्नी के साथ शारीरिक सं*बंध स्थापित करता है, वो मनुष्य अपने कुल की प्रतिष्ठा को बढ़ाने वाला होता हैं।
8. अच्छी चीजे देखना आंखों का ब्रह्मचर्य है, अच्छी चीजे सुनना कानों का ब्रह्मचर्य है और अच्छी चीजों को लिमिट में खाना ही जीभ का ब्रह्मचर्य है।
9. किसी भी चीज में सफलता आसानी से किसी को भी नही मिलती है, चाहे वो आध्यात्मिक हो या भौतिक हो, उसके लिए दिन रात संघर्ष करना पड़ता है और अपना घमंड को खत्म करना होता है।
अगर आप भी सफलता पाना चाहते हो? तो आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, क्योंकि सफलता की राह में ब्रह्मचर्य आपके लिए औषधि का काम करेगा। क्योंकि
“ब्रह्मचर्य हमे जीवन में त्याग, तपस्या और संघर्ष करना सिखाता है, इसीलिए मेरे प्यारे भाईयो और बहनों आप आज से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना शुरू कर दीजिए।”
10. जो लोग कहते हैं की काम वासना से अगर दूर रहना ही होता तो भगवान इसमें आकर्षण और क्षणिक सुख क्यो देता है? तो इसका उत्तर यह है की,
भगवान ने हमे उसके साथ ही बुद्धि और विवेक भी दिया हुआ है, ताकि हम सिर्फ संतान प्राप्ति के लिए ही शारीरिक सं*बंध बनाए और अपने कुल की प्रतिष्ठा को बढ़ाए।
Brahmacharya Motivational Quotes in Hindi
11. क्या आपको ऐसा लगता है की आपके मन में ये झंझावात चल रहा है, उसको इसके पहले किसी ने भी अनुभव नही किया हुआ है? अगर आपके पहले किसी ने भी अनुभव नही किया हुआ होता तो, ये “ब्रह्मचर्य” शब्द है ना वो कभी अस्तित्व में ही नही होता!
12. कामु*कता को खुद से दूर करने के लिए ब्रह्मचर्य, पवित्रता एवं सयम के विचार, मातृभावना और विकारो के परिणाम के विचार करना फायदेमंद साबित होता है।
13. यदि हमारी इंद्रिय हमारे वंश में न हो तो, वो “काम वास*ना” में लिप्त हो जाती हैं। उससे मनुष्य उसी प्रकार तुच्छ हो जाता है, जैसे सूर्य के आगे सभी ग्रह तुच्छ हो जाते हैं।
14. वी*र्यवान व्यक्ति खिले पुष्प के समान होता है, जो जहा जाता है वो अपने सुगंध से वहा के माहौल को खुशनुमा बना देता है।
15. और “वी*र्यनाश” करने वाला व्यक्ति उस मुरझाए हुए फूल के समान होता है, जो जहा कही भी जाता है, वहा अपनी दुर्गंध से उस जगह को मायूस कर देता है।
16. संयम ही मनुष्य की रीढ़ की हड्डी है, जैसे रीढ़ की हड्डी टूट जाने पर मनुष्य जीवित नहीं रह सकता, वैसे ही संयमहीन होकर मनुष्य बच नहीं सकता।
17. स्त्री शरीर को देखने मात्र से चित्त का हरण हो जाता है, उसके स्पर्श से बल का हरण हो जाता है , उसके साथ समागम, करने से वी*र्य का हरण हो जाता है। अतः पराई स्त्री पुरुष के लिए साक्षात विपत्ति के सामान है ।
18. जब कभी भी वी*र्य निकालने तलब मन में उठे। तो मात्र एक बार अपने आप से ये सवाल पूछ लेना कि क्या मैं अपना जीवन रोते- रोते जीना चाहता हूं? यदि उत्तर मिले हां तो बेसक वी*र्य निकाल फेंकना। लेकिन अगर जवाब आए नहीं .. तो वी*र्य हरगिज़ मत गिरने देना।
19. “सं*भोग” अर्धाग्नि को संतुष्ट करने के लिए नहीं होता। अपितु संतान प्राप्ति के लिए होता है। वरना आप ही बताए की क्या कोई अपनी ऊर्जा को खोके सुखी रहे सकता है? कदापि नहीं!
20. चरित्रवान बनो , व्याभिचारी नहीं जिससे लोगों का भरोसा आप पर बना रहे ! चरित्रवान बनने के लिए ब्रम्हचर्य की भट्टी से गुजरना पड़ेगा।
ब्रह्मचर्य पर महापुरुषों के विचार
21. पल भर के सुख के लिए वी*र्य निकालना और जीवन के तमाम पलों को नरक के समान जीने में कौन सी समझदारी है।
22. ब्रह्मचर्य के पालन से मन की एकाग्रता हासिल की जा सकती है और मन की एकाग्रता सिद्ध हो जाये तो फिर अन्य शक्तियां भी अपने – आप विकसित होने लगती हैं।
23. आयु , तेज , बल , वी*र्य , बुद्धि , लक्ष्मी , कीर्ति , यश तथा पुण्य और प्रीति ये सब ब्रह्मचर्य का पालन न करने से नष्ट हो जाते हैं।
24. एक मनुष्य चारों वेदों को जाननेवाला हो और दूसरा पूर्ण ब्रह्मचारी हो तो इन दोनों में ब्रह्मचारी ही श्रेष्ठ है । – भीष्म पितामह
25. शरीर में व्याप्त वी*र्य रूपी जल को बाहर ले जाने वाले, शरीर से अलग कर देने वाले काम को मैंने परे हटा दिया है। अब मैं इस काम को अपने से सर्वथा दूर फेंकता हूँ। मैं इस आरोग्यता बल – बुद्धिनाशक काम का कभी शिकार नहीं होऊँगा।
26. राजन् ( युधिष्ठिर ) ! जो मनुष्य आजन्म पूर्ण ब्रह्मचारी रहता है, उसके लिये इस संसार में कोई भी ऐसा पदार्थ नहीं है, जो वह प्राप्त न कर सके।
27. मै*थुन संबंधी ये प्रवृतियाँ सर्वप्रथम तो तरंगों की भाँति ही प्रतीत होती हैं, परन्तु आगे चलकर ये कुसंगति के कारण एक विशाल समुद्र का रूप धारण कर लेती हैं। का*म सबंधी वार्तालाप कभी श्रवण न करें। – नारदजी
28. “जब कभी भी आपके मन में अशुद्ध विचारों के साथ किसी स्त्री के स्वरूप की कल्पना उठे तो आप “ॐ दुर्गा देव्यै नमः” मंत्र का बार – बार उच्चारण करें और मानसिक प्रणाम करें। ” – स्वामी शिवानंदजी
29. जो विद्यार्थी ब्रह्मचर्य के द्वारा भगवान के लोक को प्राप्त कर लेते हैं, फिर उनके लिये ही वह स्वर्ग है वे किसी भी लोक में क्यों न हों, मुक्त हैं। – छान्दोग्य उपनिषद
30. “बुद्धिमान् मनुष्य को चाहिए कि वह विवाह न करे। विवाहित जीवन को एक प्रकार का दहकते हुए अंग से भरा हुआ खड्डा समझे। संयोग या संसर्ग से इन्द्रियजनित ज्ञान की उत्पत्ति होती है,
इन्द्रि-जनित ज्ञान से तत्संबंधी सुख को प्राप्त करने की अभिलाषा दृढ़ होती है , संसर्ग से दूर रहने पर जीवात्मा सब प्रकार के पापमय जीवन से मुक्त रहता है।”
Swami Vivekananda Quotes on Brahmacharya in Hindi – ब्रह्मचर्य पर स्वामी विवेकानंद के विचार
दोस्तों स्वामी जी बोलते हैं कि हमारे दिमाग में आया हुआ सिर्फ एक से*क्स के विचार से हमारा 8 दिनों का ojas यानी की inteligens नष्ट हो जाती है और सिर्फ एक बार से*क्सुअल ऐक्टिविटी में इन्वोल होने से यानी की शारीरिक सं*बंध बनाने से हमारा 45 दिनों का बना हुआ ojas नष्ट हो जाता है।
दोस्तो इसी बात को आगे बढ़ाते हुए स्वामी जी बोलते हैं कि इंसान के शरीर में इदा, पिंगला और शुष्मना यह तीन महत्वपूर्ण नाडिया होती है, जिनके माध्यम से एनर्जी हमारे शरीर में फ्लो करती है।
दोस्तो एक ऑर्डेनरी इंसान के शरीर में सिर्फ इदा और पिंगला नाड़ी ही एक्टिवेट होती है, लेकिन ब्रम्हचर्य और स्पिरिचुअल प्रैक्टिस से हमारी शुष्मना नाड़ी भी एक्टिवेट हो जाती है।
शुष्मना नाडी से एनर्जी हर एक कुंडलिनी चक्र को खोलते हुए उपर कि तरफ बेहना शुरू करती है और लगभग 12 साल के ब्रम्हचर्य के बाद हमारे शरीर में मेधा नाड़ी है, जिसे नर्व ऑफ मेमरी भी कहा जाता है वो एक्टिवेट हो जाती है।
मेधा नाड़ी एक्टिवेट होने के बाद उस इंसान का दिमाग इतना शार्प और इंटेलिजेंट हो जाता है की जिससे दुनिया में ऐसा कोई भी चीज और कोई भी गोल नहीं है जो वो इंसान हासिल ना कर सके।
32. बिना किसी प्रश्न के गुरु की आज्ञाकारिता और ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन – यही सफलता का रहस्य है।
33. प्रत्येक लड़के को पूर्ण ब्रह्मचर्य का अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और तभी विश्वास और श्रद्धा आएगी।
34. यदि कोई अपनी वासनाओं और इच्छाओं का गुलाम है, तो वह वास्तविक स्वतंत्रता के शुद्ध आनंद को महसूस नहीं कर सकता है।
35. तृष्णा की तृप्ति ही उसे और ज्यादा बढ़ाती है, जैसे अग्नि में डाला गया तेल उसे और भी अधिक प्रज्वलित कर देता है।
36. आत्मा का कोई लिंग नहीं है, वह न तो नर है और न ही स्त्री। केवल शरीर में ही कामवा*सना का अस्तित्व होता है, और जो व्यक्ति आत्मा तक पहुंचना चाहता है, वह एक ही समय में लिंग भेद नहीं कर सकता।
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आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद…
FAQ of Brahmacharya Quotes in Hindi:
ब्रह्मचर्य का मंत्र क्या है?
ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा
